यह वर्षों पहले हुआ, जब मैं 20 बरस के आसपास की उम्र का था। मैं एक देशव्यापी बस यात्रा पर था। चारलवॉय, मिशिगन में शास्त्रीय गिटार मास्टर क्लास में भाग लेने के लिए मैं डलास, टेक्सास में अपने घर से यात्रा पर निकला था। बस में बैठे-बैठे, हाईवे से गुजरते हुए, गेहूं के विशाल खेतों पर निगाह डालते हुए, कई सारे राज्यों से गुजरते हुए, रास्ते में विचार करने के लिए मेरे पास काफी सारा समय था।
इसी सब के बीच, मैने अपने जीवन की सारी गतिविधियों और अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में सोचना शुरु कर दिया। क्या यह सब मात्र गतिविधियों का यादृच्छ संग्रह था? या इन सब का मिल कर कोई अन्य प्रयोजन था? क्या कुछ गतिविधियां, दूसरी से अधिक मायने रखती हैं? क्या मैं ऐसी चीज़ों पर अपना समय लगा रहा था जो दीर्घ अवधि में वाकई मायने रखती हैं या ऐसी चीज़ों पर अत्यधिक समय व ऊर्जा लगाकर मैं अपने जीवन को व्यर्थ कर रहा था, जिनसे मुझे कभी भी कोई भी ऐसा लाभ नहीं मिलने वाला था जो वास्तविक और दीर्घजीवी मूल्यों वाला था।
मुझे पता था कि मैं अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहता था। मैं इससे अधिकतम हासिल करना चाहता था। मैं अपने जीवन के अंतिम क्षणों में पीछे मुड़ कर देखने पर यह पछतावा नहीं करना चाहता कि मैने अपने अधिकांश जीवन को व्यर्थ कर दिया। मैं, धरती पर अपने जीवन के अंतिम क्षणों में पहुंच कर इस एहसास के साथ पछतावा नहीं करना चाहता कि मैने इसे व्यर्थ कर दिया और अपनी सारी आशाओं तथा सपनों को पूर्ण संभावनाओं और पूर्णता के साथ जीने और इससे अधिकाधिक हासिल करने और न सिर्फ अपने जीवन पर प्रभाव डालने बल्कि बहुत सारे दूसरे लोगों के जीवन और अनुभव को समृद्ध करने के एकमात्र अवसर को भी गंवा दिया।
इसीलिए, मैने अपने जीवन की सभी गतिविधियों को सूचीबद्ध करने के लिए कुछ समय निकाला। मुझे यह निर्धारित करना था कि मैं अपने समय का सर्वश्रेष्ठ उपयोग कर रहा था या नहीं। मुझे यह पता करना था कि कौन सी गतिविधियां मेरा अधिकांश समय, फोकस व ध्यान ले रही थीं और किन गतिविधियों को अपनी दिनचर्या से निकालने व जीवन से बाहर कर देने की जरूरत है।
जैसे-जैसे गतिविधियों की मेरी सूची बढ़ने लगी, श्रेणियां उभरने लगी। यह दिखने लगा कि मेरी लगभग सभी गतिविधियां स्पष्ट रूप से केवल कुछ नई श्रेणियों में शामिल हो रही थी। मैने, श्रेणियों को केवल सात श्रेणियों में सीमित कर लिया। इसके बाद, जब मैने सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों का पता करने के प्रयास पर ध्यान केन्द्रित किया तो अपने जीवन में उनकी तुलनात्मक रूप से अधिक अवधि का महत्व निर्धारण करने के लिए, मैने श्रेणियों की तुलना की।
मैं इन सात श्रेणियों के तुलनात्मक महत्व के आधार पर उनकी स्पष्ट प्राथमिकता निर्धारित करने में सक्षम रहा। दशकों पहले के उस समय से लेकर आज तक मेरे जीवन में इन प्राथमिकताओं के तुलनात्मक महत्व को लेकर कभी भी संशय की स्थिति नहीं आयी।
मेरी विचार प्रक्रिया कुछ ऐसी थी।
ईश्वर को पहले रखना होगा। उसने हमें बनाया। उसने जीवन के नियमों को लिखा। ईश्वर को समझना, जीवन को समझना है। ईश्वर के नज़रिये से जीवन को देखना समझ पैदा करता है। ईश्वर को जानना और समझना ही सर्वोपरि है। इसकी पुष्टि इंजील द्वारा की गयी है जिसमें लिखा गया है कि “तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर करके न मानना” (निर्गमन 20:3) और “और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना।’ यह पहली ईश्वरीय आज्ञा है।” (मरकुस 12:30)
महत्व के हिसाब से दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज़ हमारा अपना चरित्र और व्यवहार है। अंततः मेरा जीवन, मेरे चुनावों का उत्पाद है। सबसे आखिर में, जब मुझे अपने जीवन और अपने रहने के तरीके का लेखाजोखा देने के लिए बुलाया जाएगा तो सारा उत्तरदायित्व मुझ पर होगा। यह अच्छा है कि मैं अब इसे समझता हूँ और इस समझ को अपने चुनावों पर लागू करता हूँ। चूंकि मेरे चुनाव मेरे अपने चरित्र और व्यक्तित्व से प्रभावित होते हैं, मुझे यथासंभव सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति बनने के लिए गंभीर रूप से ध्यान केन्द्रित करना होगा - ऐसा व्यक्ति जिसका मैं सबसे अधिक आदर कर सकूं। यह मेरे लिए बेहद जरूरी है कि अपने व्यवहार का उत्तरदायित्व मैं स्वयं अपने ऊपर लूं और अपने चरित्र के विकास में प्रभावी बनूं क्योंकि यह मेरे जीवन के अन्य क्षेत्रों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। जैसा कि जीसस ने कहा, “पहले अपनी आंख में से लट्ठा निकाल ले, तब तू अपने भाई की आंख का तिनका भली-भांति देखकर निकाल सकेगा” (मत्ती 7:5 ESV)।
चरित्र के क्षेत्र के बाद भी जीवन के बहुत सारे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं लेकिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण दूसरे लोगों को शामिल करना है। जैसा कि जीसस ने कहा, “और दूसरी [ईश्वरीय आज्ञा] है … ‘अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख’” (मत्ती 22:39 ESV)। लोगों के साथ संबंधों के निर्माण पर विचार करते समय, प्राथमिकता के तौर पर दूसरों से पहले परिवार के सदस्यों को पहले आना होगा क्योंकि जन्म या विवाह के माध्यम से मुझे उनके प्रति सीधे तौर पर उत्तरदायी बनाया गया था। किसी से जन्म से या विवाह के माध्यम से जुड़ना, अधिक प्रतिबद्धता और उत्तरदायित्व की मांग करता है। उदाहरण के लिए, जब जीसस सलीब पर मृत शैय्या पर पर थे तो उन्होने लूका को यह निर्देश देने के लिए समय निकाला जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी माँ की देखभाल हो (देखिए लूका 19:26-27)। “पर यदि कोई अपनों की और निज करके अपने घराने की चिन्ता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है, और अविश्वासी से भी बुरा बन गया है” (1 तिमुथियुस 5:8 ESV)।
परिवार के बाद, संबंधी तथा दूसरों के साथ के चर्चा आती है। इनमें मित्र, आधिकारिक लोग जैसे कि नियोक्ता, धार्मिक नेता तथा सरकारी कर्मचारी तथा परिचित व अन्य के साथ के चर्चा आती है।
व्यक्तियों के बाद, अंतिम तीन उत्तरदायित्व क्षेत्रों में क्रमशः स्वास्थ्य, कार्य और वित्त आते हैं। स्वास्थ्य, कार्य से पहले इसलिए आता है क्योंकि आपको कुशल तरीके से काम करने के लिए अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। यदि आप अपना स्वास्थ्य खो बैठेंगे तो आप अपने उत्तरदायित्वों को ठीक ढ़ंग से निभा नहीं पाएंगे।
अंत में, वित्त तथा संपत्ति से जुड़े उत्तरदायित्व आते हैं। ये महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व हैं, लेकिन ये जीवन के प्राथमिक फोकस नहीं हैं। वे जीवन को मूल्य नहीं प्रदान करते हैं या किसी प्रयोजन को पूरा नहीं करते हैं जैसा कि कार्य करता है। वे अधिकांशतः सहायक भूमिका में होते हैं। वे इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि जीवन के अधिक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद रहें।
तो अब सब कुछ आपके सम्मुख है! इस प्रकार से मेरा मानना है कि हमारे जीवन के सभी उत्तरदायित्व तथा गतिविधियां, इन सात सामान्य श्रेणियों में फिट होती हैं। जब उन गतिविधियों तथा उत्तरदायित्वों को प्राथमिकता के आधार पर रखा जाता है तो निम्नलिखित, आकार लेते हैं:
- ईश्वर, जिसमें आध्यात्मिकता और अमरत्व से संबंधित मामले शामिल हैं। यह श्रेणी ईश्वर के प्रति हमारी समझ और संबंध तथा अनन्त, अलौकिक, आध्यात्मिक क्षेत्र में जीवन से संबंधित होती है।
- चरित्र, जिसमें चरित्र का विकास और पहचान की खोज शामिल है - वास्तव में मैं कौन हूँ - मेरे उपहार, व्यक्तित्व की ताकत क्या है तथा मेरे व्यवहार, नज़रिए, इरादे, विकल्प और यहां तक कि मेरे विचार क्या हैं।
- परिवार, जिसमें विवाह, परवरिश तथा अन्य पारिवारिक संबंध शामिल हैं।
- मित्र, परिचित तथा अधिकारी। यह एक विस्तृत श्रेणी है जो कि परिवार के बाहर समस्त निजी संबंधो और रिश्तों से संबंधित है। इसमें अपरिचितों के साथ आकस्मिक मुलाकातें, तथा परिचितों, मित्रों तथा आधिकारिक व्यक्तियों के साथ संबंध भी शामिल हैं। मेरा विश्वास है कि यदि हम सभी मुलाकातों में सकारात्मक सफलता की संभावना को देखें तो हम परिचितों, मित्रों, आधिकारिक व्यक्तियों और यहां तक कि अजनबी लोगों के साथ सभी निजी संबंधो की संपूर्ण संभावनाओं को हकीकत में बदलने के काफी नज़दीक पहुंच जाएंगे।
- स्वास्थ्य, जिसमें शारीरिक स्वास्थ्य के सभी पहलू हैं, जिसमें आहार, व्यायाम और तनाव संबंधी मामले शामिल हैं। हमारा स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए जिससे कि हम अपने जीवन के समस्त अनुभवों का आनंद ले सकें।
- कार्य, प्रयोजन और नियति। इसमें वे सभी गतिविधियां शामिल हैं जो हमारे जीवन को अर्थ और हर सुबह सो कर उठने के विविध कारण प्रदान करती हैं। इनमें कार्य, शौक, प्रयोजन और रचनात्मक, कलात्मक प्रयास शामिल हैं।
- वित्त तथा संपत्ति। यह श्रेणी धन, घर, वाहन तथा अन्य सांसारिक संपत्तियों से जुड़े मामलों से संबंधित है। ये वे लक्ष्य नहीं हैं जिनके लिए प्रयास किया जाए, बल्कि ये ऐसे संसाधन हैं जिनको बुद्धिमानी से उपयोग किया जाना चाहिए जिससे कि अधिक महत्वपूर्ण लक्ष्यों तथा उत्तरदायित्वों को पूरा करने के हमारे प्रयासों को समर्थन मिल सके।
यदि आप वास्तव में इनके बारे में सोचें तो आप भी पाएंगे कि आपके जीवन का सब कुछ इन क्षेत्रों में फिट होता है। मैने ऐसा ही पाया…और मैने इसे अपनाया भी। मुझे इस के बारे में सोचने में काफी समय लगा।
चीज़ों को मेरे देखने के तरीके से, जीवन की ये सात प्राथमिकताएं, निजी उत्तरदायित्वों की सात श्रेणियां भी हैं।
लेकिन आप क्या सोचते हैं? क्या आप सहमत हैं? असहमत? अधिक महत्वपूर्ण रूप से, क्या आपने रुक कर, अपने व्यस्त जीवन को विराम देकर वास्तव में आपके जीवन की विभिन्न गतिविधियों में शामिल मूल्यों के बारे में विचार किया है? दरअसल इस लेख को पढ़ने के बाद आपको यह सबसे महत्वपूर्ण बात लगे। मेरी गुजारिश है कि आप अपने जीवन में विचारवान बनें! क्या आप यात्रा के लिए सर्वश्रेष्ठ मार्ग चुन रहे हैं? या इस बदलने की जरूरत है? बीता हुआ हर पल, हमारी जानकारी से कहीं अधिक मूल्यवान है! इसलिए, मित्रों! बुद्धिमानी के साथ निवेश करिए।

