अपने निर्माता से संपर्क करें
कुछ लोग “खुद का अविष्कार करने” या “आत्म-निर्मित पुरुष” होने का दावा करते हैं। उनके सफल होने में दृढ़-संकल्प का थोड़ा योगदान हो सकता है, लेकिन काफी हद तक, आपकी पहचान और आपका प्रयोजन खोजा जाएगा न कि अविष्कृत किया जाएगा।
यदि आप कुछ खोजते हैं तो इसका अर्थ होता है कि वह पहले से मौजूद है। आप उसका निर्माण नहीं कर रहे हैं। आप तो बस उसे पा रहे हैं—खोल रहे हैं। यदि यह सत्य है तो इसे वहां पर किसने रखा है? किसने आपका और आपके जीवन के प्रयोजन का निर्माण किया?
अंततः उस व्यक्ति की खोज करने जो बनने के लिए आपने जन्म लिया और वह प्रयोजन जिसे पूरा करने के लिए आप पैदा हुए थे, आपको अपने निर्माता से जुड़ना चाहिए। उसके पास आपके जीवन के महानतम सवालों के उत्तर हैं। उसे उस व्यक्ति का पता है जो बनने के लिए आप पैदा हुए हैं। उसे आपके जीवित होने का कारण पता है। वह एकमात्र है जिसे आपके बारे में सब कुछ पता है, वो तो आपको उतना जानता है जितना आप खुद को नहीं जानते हैं, क्योंकि उसने आपको बनाया है।
“दुनिया की हर वस्तु उसी ने बनाई; ऐसा कुछ भी नहीं है जो उसकी उसकी रचना न हो। उसी में जीवन था और उसका जीवन ही दुनिया के लोगों के लिये प्रकाश (ज्ञान, भलाई) था।” - यूहन्ना 1:3-4
साधारण से असाधारण
एक दिन जब यीशू उस झील के पास से गुजर रहे थे तो उन्होने दो भाइयों शमौन और अन्द्रियास को देखा जो मछुआरे थे और उस झील में मछली पकड़े के लिए अपना जाल तैयार कर रहे थे।
“यीशू ने उनसे कहा, ‘आओ, मेरा अनुसरण करो और मैं तुमको अलग तरह का मछुआरा बना दूंगा। तुम इंसानों के मछुआरे बनोगे न कि मछलियों के।” शमौन और अन्द्रियास ने फौरन अपने जाल छोड़ दिए और उनके पीछे चल दिए।” — मत्ती 04:19-20 (सरल पाठ संस्करण)
कुछ ही समय बाद याकूब और यूहन्ना को भी ऐसा ही सम्मोहक निमंत्रण दिया:
यीशू ने गलील झील के पास चलना जारी रखा। उन्होने दो दूसरे भाइयों याकूब और यूहन्ना को देखा जो जब्दी के बेटे थे। वे अपने पिता जब्दी के साथ एक नाव में थे। वे मछली पकड़ने के लिए अपने जाल तैयार कर रहे थे। यीशू ने उनको साथ आने के लिए कहा। उन्होने फौरन अपने पिता और नाव को छोड़ दिया और उन्होने यीशू का अनुसरण किया।” — मत्ती 04:21-22 (सरल पाठ संस्करण)
यह पल इन लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था। इस पल से पहले उनका जीवन सामान्य था; कुछ भी विशेष नहीं था; और भविष्य में भी कुछ विशेष होने की आशा न थी। यदि यीशू के साथ उनकी मुलाकात न होती तो इस बात की काफी संभावना थी कि वे उनका हर दिन वैसा ही बीतता जैसे पहले बीत रहा था — सुबह जल्दी उठना, जीवन यापन के लिए मछली पकड़ना, अपने मछली पकड़ने के जाल साफ करना, अपनी नावों की मरम्मत करना, पकड़ी हुई मछलियों को बेचना, सोने जाना… और सुबह उठ कर अलगे दिन यही सब कुछ करना… अपने पूरे जीवन की अवधि में हर रोज यही करना… और हम न जानते कि वे इस धरती पर मौजूद थे।
यीशू के साथ इस पल की मुलाकात के बाद, इन लोगों ने अपनी पहचान की खोज शुरु की और उनको पता लगा कि वे असाधारण जीवन जीने के लिए बने थे। उनको अपने जीवन के लिए एक प्रयोजन हासिल हुआ जो कि उन सब से बडा़ था। वे, बस यूं ही मछली पकड़ते हुए अपना जीवन नहीं बिताएंगे। वे दुनिया को बदलेंगे! उनकी आगे की यात्रा आसान या सहज नहीं थी, लेकिन उनकी इस यात्रा के परिणामस्वरूप दुनिया बदल गयी; और दो हजार वर्षों के बाद, हम अभी भी उनके बारे में बात कर रहे हैं!
इन लोगों के लिए किस चीज ने अंतर पैदा किया? वह क्या था जिसने सामान्य, भुला दिए जाने वाले व परिणाम रहित जीवन जी रहे इन साधारण व्यक्तियों के जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया… वे पूरी तरह से समझ गए कि वे कौन थे और वे उनको क्या बनना था; वे व्यक्ति जिनका प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि अनगिनत जीवन बदल गए? इन व्यक्तियों के जीवन के कारण राष्ट्रों पर प्रभाव पड़ा; और इस दुनिया में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन हुआ!
इन लोगों के लिए तब सब कुछ बदल गया जब इन्होने यीशू के उनके अनुसरण के आह्वान का उत्तर दिया। क्यों? उससे ऐसा क्या अंतर पैदा हो गया? यीशू के प्रभाव के बारे में वह क्या था जिसने उनके जीवनों को अर्थपूर्ण बना दिया और इन व्यक्तियों को शक्तिशाली विश्व-परिवर्तक के रूप में रूपांतरित कर दिया?
यीशू द्वारा उनके आह्वान में इसका उत्तर निहित है। और रोमांचक बात यह है कि वही आह्वान आपके लिए भी है!
प्रयोजन और पहचान का पता लगाने वाली कुंजी
यीशू का आह्वान बेहतर भविष्य के वादे के साथ आता है! “मैं तुमको लोगों का मछुआरा बना दूंगा” (मरकुस 1:17)। इन लोगों ने तत्काल वह काम छोड़ दिया और बिना पीछे देखे यीशू के पीछे चल दिए! उन्होने उनको उबाऊ, साधारण जीवन से बाहर निकालने और उस साहस, प्रयोजन, अर्थ और महत्व भरे भविष्य का वादा किया जिसके लिए उनके हृदय व्याकुल थे। उन्होने उनको एक ऐसे जीवन का वादा किया जो ऐसा अंतर पैदा करेगा जो लोगों के जीवन को इतने महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा कि वे फिर पहले जैसे नहीं रह जाएंगे। क्योंकि इन लोगों ने यीशू के अनुसरण के आह्वान का उत्तर दिया, इसलिए वे न केवल अपने ऐसे सामान्य जीवन से मुक्त हो सके जो अर्थहीन या महत्वविहीन था बल्कि उनके द्वारा अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित करने का असर अनंत काल तक रहेगा
बाइबिल को मूल रूप से अंग्रेजी में नहीं लिखा गया था। जब हम यीशू द्वारा मूल भाषा में उपयोग किए गए शब्द “फॉलो” की नजदीकी से जांच करते हैं तो आम तौर पर इसका अनुवाद “आने” के अर्थ में किया जाता है। जब यीशू ने कहा, “फॉलो मी,” तो वास्तव में वे कह रहे थे कि “आओ; अभी आओ!” यह बिना विलंब के प्रतिक्रिया देने वाला आमंत्रण है! यह यीशू के साथ पूरे जीवन चलने, उनको जीवन भर का साथी समझने का आमंत्रण है। यह उनके साथ संबंध स्थापित करने के बारे में है। जब हम इस आमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं तो सब कुछ बदल जाता है। अचानक ही जीवन में हम अकेले नहीं रह जाते हैं! हमारे पास एक शक्तिशाली मित्र है जो हमारे जीवनों को अद्भुद, अर्थपूर्ण और प्रयोजन वाला बनाने की शुरुआत कर सकता है!
अद्भुद होने वाली चीजों में से एक यह है कि हम यीशू के साथ संबंध बनाते हैं और उनके बारे में और अधिक जानते हैं, वे हमारे बारे में, हमारी पहचान के बारे में, हमारे प्रयोजन के बारे में और हम वास्तव में क्या बनने के लिए पैदा हुए हैं, यह सब कुछ बता कर हमें उत्तर देते हैं। हम जैसे-जैसे उनको जानते जाते हैं, अपने बारे में अधिक बेहतर जानते जाते हैं!
जब बाइबिल कहती है कि यीशू ने अन लोगों को“कॉल” किया तो मूल भाषा में शब्द “कॉल” का अर्थ किसी का नाम लेना या किसी को आवाज़ लगाना हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ किसी को कोई नाम देना भी हो सकता है।इसका अर्थ है कि यीशू उनका अनुसरण करने के लिए आपका आह्वान कर रहे हैं, वे आपको बताना चाहते हैं कि आप कौन हैं! उनका अनुसरण करने के लिए उनके आह्वान के प्रयोजन का एक हिस्सा यह है कि आप यह जान सकें कि आप वास्तव में क्या हैं और आपके होने का क्या अर्थ है! वे आपकी सही पहचान जानने में आपकी सहायता करना चाहते हैं!
ऐसे कई मौके आये जब यीशू ने लोगों को नए नाम दिए क्योंकि उनको पता था कि वे लोग उस समय जो कुछ थेउससे बेहतर बनने के लिए पैदा हुए थे। यह नया नाम उनके लिए वह स्थायी चिह्न था जो यह बताता था कि वे बेहतर चीजों के लिए बने थे! इसने उनके द्वारा खुद की सोची हुई नियति से अधिक बेहतर नियति का संकेत दिया! पतरस उनमें से एक थे जिनको यीशू ने नया नाम दिया था:
“फिर यीशू ने उनसे पूछा, ‘लेकिन तुम मुझे क्या कहते हो?’
शमौन पतरस ने उत्तर दिया, ‘आप मसीह हैं, साक्षात परमेश्वर के पुत्र।’
यीशू ने उनसे कहा:
योना के पुत्र शमौन, तुम धन्य हो! यह तुमको स्वतः (अपने आप) नहीं पता लगा। इसे स्वर्ग में स्थित मेरे पिता द्वारा तुमको दर्शाया गया है। इसलिए मैं तुमको पतरस बुलाउंगा, जिसका अर्थ है ‘एक चट्टान।’ इस चट्टान पर मैं अपना गिरजा बनाउंगा और स्वयं मृत्यु भी उसके जितनी शक्तिशाली नहीं होगी।मैं तुमको स्वर्ग के राज्य की चाभियां दूंगा और स्वर्ग में स्थित ईश्वर हर उस चीज को अनुमत करेंगे जिसको तुम यहां पृथ्वी पर अनुमत करोगे। लेकिन वे ऐसी कोई भी चीज अनुमत नहीं करेंगे जिसे तुम यहां पर अनुमत नहीं करोगे।’” — मत्ती 16:15-19 (समकालीन अंग्रेजी संस्करण)
आप भी पतरस की ही तरह हैं। आप अपनी सोच से कहीं अधिक बनने के लिए पैदा हुए हैं! आप बड़ी चीजों को करने के लिए बने हैं! आपकी नियति आपकी सोच से कहीं अधिक व्यापक है! यीशू के अनुसरण के आह्वान का उत्तर देने में अपने प्रयोजन और अपने पहचान की खोज की कुंजी छिपी है। सच्चा जीवन आपकी प्रतीक्षा कर रहा है, वह जीवन जिसे जीने के लिए आपका जन्म हुआ है! क्या आप यीशू के आह्वान का उत्तर देने और अपने सामान्य जीवन को यीशू द्वारा प्रदान किए गए प्रयोजन से भरे व अर्थपूर्ण जीवन से बदलने के लिए तैयार हैं? नष्ट करने के लिए समय नहीं है!
“उनका प्रयोजन यह था कि लोग परमेश्वर को खोजें, हो सकता है वे उसे उन तक पहुँच जाएं। वे हममें से किसी से भी वह दूर नहीं हैं, क्योंकि वे हमें जीवन जीने, चलने और वह बनने की शक्ति देते हैं जो हम वास्तव में हैं।” — प्रेरितों के काम 17:27-28 (समकालीन अंग्रेजी संस्करण)

