राज्य का पूर्ण सुसमाचार - भाग 3
यीशु मसीह का सुसमाचार हमें उद्धार का मार्ग दिखाता है, लेकिन सुसमाचार उससे कहीं, कहीं अधिक है। सुसमाचार हमें न केवल उद्धार का मार्ग, बल्कि जीवन का मार्ग दिखाता है। सुसमाचार में, हम जीवन, मृत्यु, परमेश्वर और उनके राज्य के बारे में सत्य की खोज करते हैं।
निस्संदेह, सुसमाचार उद्धार का संदेश है, जैसा कि पौलुस ने पुष्टि की:
“हे भाइयो, अब मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूँ जो पहले सुना चुका हूँ, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिसमें तुम स्थिर भी हो। उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ।” —1 कुरिन्थियों 15:1–2
“और उसी में तुम पर भी, जब तुम ने सत्य का वचन सुना जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी। वह उसके मोल लिये हुओं के छुटकारे के लिये हमारी मीरास का बयाना है, कि उसकी महिमा की स्तुति हो।” —इफिसियों 1:13–14
लेकिन सुसमाचार उद्धार से कहीं बढ़कर है। जब यीशु ने अपने चेलों को बाहर भेजा, तो उन्होंने उन्हें मसीह के क्रूस के बारे में प्रचार करने के लिए नहीं भेजा। यीशु अभी मरे नहीं थे, इसलिए चेलों के पास सुसमाचार के संदेश का वह हिस्सा अभी नहीं था। यीशु ने उन्हें परमेश्वर के राज्य के बारे में प्रचार करने के लिए भेजा था जो उन्होंने उन्हें सिखाया था। यह सब पूर्ण सुसमाचार संदेश का हिस्सा है।
“फिर उसने बारहों को बुलाकर उन्हें सब दुष्टात्माओं और बीमारियों को दूर करने की सामर्थ्य और अधिकार दिया, और उन्हें परमेश्वर के राज्य का प्रचार करने और बीमारों को अच्छा करने के लिये भेजा। … अत: वे निकलकर गाँव–गाँव सुसमाचार सुनाते, और हर कहीं लोगों को चंगा करते हुए फिरते रहे।” —लूका 9:1–6
सुसमाचार केवल उद्धार का संदेश ही नहीं है। उद्धार सुसमाचार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसमें और भी बहुत कुछ है।
पूर्ण सुसमाचार में चंगाई शामिल है
सुसमाचार में हमारे शरीरों, हमारे मन और हमारी भावनाओं का चंगा होना शामिल है।
“हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों में उन्नति करे और भला चंगा रहे।” —3 यूहन्ना 2
यहाँ तक कि पुराना नियम भी इसकी पुष्टि करता है।
“हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है” —भजन संहिता 103:2–3
“निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया” —यशायाह 53:4
“प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उसने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है कि बन्दियों को छुटकारे का और अंधों को दृष्टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूँ और कुचले हुओं को छुड़ाऊँ, और प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष का प्रचार करूँ।” —लूका 4:18-19
यीशु ने हर उस व्यक्ति को चंगा करके इस बात की पुष्टि भी की जो किसी भी प्रकार की बीमारी, रोग या अक्षमता के साथ उनके पास आया था।
“सब उसे छूना चाहते थे, क्योंकि उसमें से सामर्थ्य निकलकर सब को चंगा करती थी।” —लूका 6:19
“यह जानकर यीशु वहाँ से चला गया। और बहुत लोग उसके पीछे हो लिए, और उस ने सब को चंगा किया” —मत्ती 12:15
“जब संध्या हुई तब वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए जिनमें दुष्टात्माएँ थीं और उसने उन आत्माओं को अपने वचन से निकाल दिया; और सब बीमारों को चंगा किया। ताकि जो वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो : “उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।"" —मत्ती 8:16–17
“लोग यह जो हुआ था उसे देखने को निकले, और यीशु के पास आकर जिस मनुष्य से दुष्टात्माएँ निकली थीं, उसे यीशु के पाँवों के पास कपड़े पहिने और सचेत बैठे हुए पाकर डर गए” —लूका 8:35
पवित्रशास्त्र में और भी बहुत सारे उदाहरण हैं। यीशु ने उनके पास आने वाले हर एक को चंगा किया, और लगातार यह दिखाया कि परमेश्वर की इच्छा है कि हम अपने पूरे जीवन में मन, शरीर और भावनाओं से स्वस्थ रहें। यह परमेश्वर के राज्य का पूरा सुसमाचार है। यदि हम इससे कम कुछ भी मानते हैं, तो हम अपनी अविश्वास के द्वारा स्वयं को ही नुकसान पहुँचा रहे हैं।
पूर्ण सुसमाचार में दुष्ट आत्माओं से मुक्ति शामिल है।
सुसमाचार में दुष्ट आत्माओं और उनके हानिकारक प्रभावों से मुक्ति भी शामिल है।
यीशु ने तो यह भी कहा कि दुष्ट शक्तियों से मुक्ति इस बात का संकेत था कि परमेश्वर का राज्य आ गया है।
“परन्तु यदि मैं परमेश्वर की सामर्थ्य से दुष्टात्माओं को निकालता हूँ, तो परमेश्वर का राज्य तुम्हारे पास आ पहुँचा है।” —लूका 11:20
यीशु ने हमारे लिए इसका उदाहरण प्रस्तुत किया।
“वहाँ एक स्त्री थी जिसे अठारह वर्ष से एक दुर्बल करनेवाली दुष्टात्मा लगी थी, और वह कुबड़ी हो गई थी और किसी रीति से सीधी नहीं हो सकती थी। यीशु ने उसे देखकर बुलाया और कहा, ‘हे नारी, तू अपनी दुर्बलता से छूट गई।‘ तब उसने उस पर हाथ रखे, और वह तुरन्त सीधी हो गई और परमेश्वर की बड़ाई करने लगी।
इसलिये कि यीशु ने सब्त के दिन उसे अच्छा किया था, आराधनालय का सरदार रिसियाकर लोगों से कहने लगा, ‘छ: दिन हैं जिन में काम करना चाहिए, अत: उन ही दिनों में आकर चंगे हो, परन्तु सब्त के दिन में नहीं।‘
यह सुन कर प्रभु ने उत्तर दिया, ‘हे कपटियो, क्या सब्त के दिन तुम में से हर एक अपने बैल या गदहे को थान से खोलकर पानी पिलाने नहीं ले जाता? तो क्या उचित न था कि यह स्त्री जो अब्राहम की बेटी है जिसे शैतान ने अठारह वर्ष से बाँध रखा था, सब्त के दिन इस बन्धन से छुड़ाई जाती?’” —लूका 13:11-16
“जब संध्या हुई तब वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए जिनमें दुष्टात्माएँ थीं और उसने उन आत्माओं को अपने वचन से निकाल दिया; और सब बीमारों को चंगा किया।” —मत्ती 8:16
“जो वचन उसने इस्राएलियों के पास भेजा, जब उसने यीशु मसीह के द्वारा (जो सब का प्रभु है) शान्ति का सुसमाचार सुनाया, वह वचन तुम जानते हो, जो यूहन्ना के बपतिस्मा के प्रचार के बाद गलील से आरम्भ होकर सारे यहूदिया में फैल गया : परमेश्वर ने किस रीति से यीशु नासरी को पवित्र आत्मा और सामर्थ्य से अभिषेक किया; वह भलाई करता और सब को जो शैतान के सताए हुए थे, अच्छा करता फिरा, क्योंकि परमेश्वर उसके साथ था।” —प्रेरितों के काम 10:36-38
“और सारे सीरिया देश में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो नाना प्रकार की बीमारियों और दु:खों में जकड़े हुए थे, और जिन में दुष्टात्माएँ थीं, और मिर्गीवालों और लकवे के रोगियों को, उसके पास लाए और उस ने उन्हें चंगा किया।” —मत्ती 4:24
जब यीशु ने अपने शिष्यों को दूसरों की सेवा के लिए भेजा, तो उन्होंने उन्हें शक्तिहीन नहीं भेजा। उन्होंने उन्हें दुष्ट आत्माओं के अत्याचार से लोगों को मुक्त करने का अधिकार दिया।
“उसने बारहों को अपने पास बुलाया और उन्हें दो दो करके भेजने लगा; और उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया। … तब उन्होंने जाकर प्रचार किया कि मन फिराओ, और बहुत सी दुष्टात्माओं को निकाला, और बहुत से बीमारों पर तेल मलकर उन्हें चंगा किया।” —मरकुस 6:7-13
“वे सत्तर आनन्द करते हुए लौटे और कहने लगे, ‘हे प्रभु, तेरे नाम से दुष्टात्मा भी हमारे वश में हैं।‘
उसने उनसे कहा, ‘मैं शैतान को बिजली के समान स्वर्ग से गिरा हुआ देख रहा था। देखो, मैं ने तुम्हें साँपों और बिच्छुओं को रौंदने का, और शत्रु की सारी सामर्थ्य पर अधिकार दिया है; और किसी वस्तु से तुम्हें कुछ हानि न होगी।‘” —लूका 10:17-19
“बीमारों को चंगा करो, मरे हुओं को जिलाओ, कोढ़ियों को शुद्ध करो, दुष्टात्माओं को निकालो। तुम ने सेंतमेंत पाया है, सेंतमेंत दो।” —मत्ती 10:8
यह अधिकार अस्थायी नहीं था। यीशु के स्वर्ग में अपने पिता के पास वापस आरोहण करने के बाद भी शिष्यों ने इस अधिकार के साथ दुष्ट आत्माओं पर सेवा जारी रखी।
“और फिलिप्पुस सामरिया नगर में जाकर लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा। 6जो बातें फिलिप्पुस ने कहीं उन्हें लोगों ने सुनकर और जो चिह्न वह दिखाता था उन्हें देख देखकर, एक चित्त होकर मन लगाया। 7क्योंकि बहुतों में से अशुद्ध आत्माएँ बड़े शब्द से चिल्लाती हुई निकल गईं, और बहुत से लकवे के रोगी और लंगड़े भी अच्छे किए गए; 8और उस नगर में बड़ा आनन्द छा गया।” —प्रेरितों के काम 8:5-8
“यरूशलेम के आसपास के नगरों से भी बहुत लोग बीमारों और अशुद्ध आत्माओं के सताए हुओं को ला लाकर, इकट्ठे होते थे, और सब अच्छे कर दिए जाते थे।” —प्रेरितों के काम 5:16
यीशु ने यह स्पष्ट कर दिया कि बुरी आत्माओं पर यह अधिकार हर विश्वासी को दिया गया है, और इस अधिकार और शक्ति का प्रदर्शन सुसमाचार की सेवकाई का एक हिस्सा है।
“और उसने उनसे कहा, “तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा; विश्वास करनेवालों में ये चिह्न होंगे कि वे मेरे नाम से दुष्टात्माओं को निकालेंगे, नई नई भाषा बोलेंगे, साँपों को उठा लेंगे, और यदि वे प्राणनाशक वस्तु भी पी जाएँ तौभी उनकी कुछ हानि न होगी; वे बीमारों पर हाथ रखेंगे, और वे चंगे हो जाएँगे।” —मरकुस 16:15-18
दुख की बात है कि आज लगभग किसी भी पारंपरिक चर्च की मंडली में, चर्च के सदस्यों का एक महत्वपूर्ण प्रतिशत बीमार, रोगग्रस्त, या अवसाद या अन्य मानसिक या भावनात्मक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित है।
यदि हम अपने स्वयं के जीवन और अपने स्वयं के परिवारों के लिए सुसमाचार के संपूर्ण संदेश पर विश्वास नहीं करते हैं, तो हम दूसरों को सुसमाचार प्रभावी ढंग से कैसे संप्रेषित कर सकते हैं?
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