महत्वपूर्ण चीजों को ऊपर रखना

बरसों पहले मैं गिटार बजाने के लिए डालास से मिशीगन के चारलेवोए जा रहा था। इस यात्रा में सोच-विचार करने के लिए मेरे पास काफी समय था, और उसी दौरान एक समय पर मैने अपने जीवन के प्रमुख क्षेत्रों को एकत्र करके उनके महत्व के क्रम में उनको सिलसिलेवार व्यवस्थित किया। फिर विस्तार से अपने निष्कर्षों के वर्णन के लिए मैने एक लेख लिखा। तब से लेकर आज तक “जीवन की सात प्राथमिकताएं”, शीर्षक वाले उस लेख का अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और मेरे लिखे लेखों में से सबसे अधिक पढ़े जाने वाले लेखों में से एक बन चुका है।

संक्षेप में दोहराने के लिए, जीवन की मेरी सात प्राथमिकताएं इस प्रकार से हैं:

  1. परमेश्वर के साथ मेरे संबंध

  2. मेरा चरित्र, नैतिकता और निजी विकास

  3. मेरा परिवार

  4. मेरे परिवार से बाहर के लोगों, नेताओं, सरकारी अधिकारियों, नियोक्ताओं, मित्रों और जान पहचान वालों के साथ मेरे संबंध

  5. मेरा स्वास्थ्य

  6. मेरा काम, मिनिस्ट्री और खाली समय की गतिविधियाँ

  7. मेरा वित्त और संपत्ति

इन सभी क्षेत्रों के महत्व हैं, लेकिन मेरा विश्वास है कि इस सूची के शीर्ष के क्षेत्र, उनके नीचे के क्षेत्रों से अधिक महत्वपूर्ण हैं। मेरा विश्वास है कि मैं प्रत्येक प्राथमिकता की स्थिति को इंजील के अनुरूप सिद्ध कर सकता हूँ। एक उदाहरण के लिए, जब मोसेस ने परमेश्वर के वचनों का पालन करने के स्थान पर अपनी पत्नी को सुनने का निर्णय लिया, तो निर्गमन 4 में परमेश्वर उसे मारने आए। मेरे लिए इस बात का मजबूत संकेत है कि हमें परमेश्वर के प्रति अपने समर्पण को परिवार के संबंधों से ऊपर रखना चाहिए, भले ही इससे परिवार के सदस्यों के साथ कुछ संघर्ष क्यों ना हो। दूसरे बाइबिल अवतरणों में इस बात को अधिक सीधे तरीके से कहा गया है।

शॉर्टकट स्वीकार करने की छिपी लागत

इस सूची को बनाने के बरसों बाद, अपनी प्राथमिकताओं को निभाने में मैने काफी संघर्ष किया। ऐसा लगता है कि मैने अपने मजबूत विश्वास की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के बारे में अक्सर कम महत्वपूर्ण को चुना है — और ऐसा बहुत बहुत आसानी से होता है। ऐसा क्यों है, और इसे किस तरह से सुधारें?

अपने जीवन को देखते हुए — और मुझे लगता है कि यह हम सभी के लिए सत्य है — मेरा विश्वास है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हम अपनी जरूरतों को पूरा करने से प्रेरित होते हैं, और हमारी जरूरतें किसी सस्ते व तेज तरीके से संतुष्ट कर सकते हैं, और इसलिए हम कुछ ऐसा चुनते हैं जो शॉर्टकट होता है, और उच्चतर मूल्यों को अस्वीकार करते हैं, जो हमारे लिए सबसे अच्छे होते हैं, और दीर्घकालीन गहरी संतुष्टि और पूर्णता प्रदान करेंगे लेकिन वे आसान और तेज नहीं हैं।

यह शैतान के प्रलोभन की एक पुरानी कहानी है। शैतान के प्रलोभनों का एक आम लक्षण है। वह हमें ऐसी चीज़ों से ललचाता है जो छोटी अवधि के सुख और संतुष्टि का वादा करती हैं, लेकिन मिठाई खाने के बाद थोड़े से समय के लिए मिलने वाली मिठास की तरह, यह सुख और संतुष्टि स्थायी नहीं रहती है, और इसके दूसरे पहलू में होने वाली हानि पहले से अधिक रिक्तता और बुरा एहसास देकर जाती है, जो कि दीर्घ अवधि समस्याओं को पैदा करती है, और साथ ही हममें इसी तरह के बरताव के लिए एक तरह की भूख पैदा करती है। बिल गोथार्ड के शब्दों में, “पाप की मजदूरी, और अधिक पाप ही होता है।” लेकिन निश्चित रूप से यह उस समय अच्छा लगता है, है ना? कभी-कभार, इन खराब चुनावों के दीर्घ अवधि परिणाम होते हैं, और हम उनको लिए हमेशा भुगतते हैं।

ईसा मसीह किस तरह से शैतान के प्रलोभनों का सामना करने में सफल रहे (मत्ती 4; मरकुस 1; लूका 4) जबकि आदम और हौव्वा आसानी से फंस गए थे (उत्पत्ति 3)? यदि मैं उसका उत्तर पता कर सकूं, तो मेरा विश्वास है कि मैं यह समझ सकूंगा कि महत्वपूर्ण चीजों को ऊपर कैसे रखा जाए।

शैतान जो हमसे घृणा करता है, हमें अपने आप को अभी पुरस्कृत करने और बाद में उसका भुगतान करने का प्रलोभन देता है, जबकि वह मूल्य उस खुशी से कहीं अधिक होता है। परमेश्वर प्रेम से हमें ठीक इसके विपरीत करने को कहता है और समृद्ध, शाश्वत पुरस्कारों का मूल्य बाद में देने को कहता है। मूसा ने इसे समझा। “उन्होने पाप के क्षणिक सुख के स्थान पर परमेश्वर के लोगों की पीड़ाओं को साझा करना चुना। उन्होने सोचा कि मिस्र के खजानों का मालिक बनने से ईसा मसीह के वास्ते पीड़ा सहना बेहतर था, क्योंकि वे आगे मिलने वाले महान पुरस्कारों को देख रहे थे” (इब्रानियों 11:25-26 एनएलटी-अनु.)

इस विनिमय पर पौलुस की पकड़ बेहतर लगती है, जब वे कहते हैं कि, “मैं मानता हूँ कि वर्तमान काल (इन वर्तमान जीवन) की पीड़ा की तुलना में हम पर, हमारे लिए और हमारे भीतर बरसने वाली महिमा की कोई तुलना है ही नहीं!” (रोमियो 8:18 एएमपी-अनु.)। मेरी समस्या यह है कि मैं हमेशा इस पर विश्वास नहीं करता हूँ। यदि मैं यकीनी तौर पर वाकई इसमें विश्वास करता तो मेरे जीवन के हर क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ को चुनने का रिकॉर्ड कहीं अधिक बेहतर होता।

परमेश्वर के साथ जिस तरह का संबंध मैं रखना चाहता हूँ उसे बनाने में मुझे क्या रोक रहा है?

मैं ऐसे समझौते क्यों करता हूँ जो मेरे चरित्र और सत्यनिष्ठा को पतित करते हैं और मुझे उस तरह का इंसान बनने से दूर क्यों करते हैं जिसका मैं सबसे अधिक सम्मान करता हूँ?

मैं क्यों अपने परिवार की तुलना में अपना अधिकांश ध्यान और निष्ठा गुजरते हुए जान-पहचान वाले लोगों पर केन्द्रित करता हूँ?

मैं स्वस्थ आहार की तुलना में अस्वास्थ्यकर (जंक) आहार क्यों चुनता हूँ?

क्या मैं वाकई परमेश्वर के वादे पर विश्वास करता हूँ?

मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने दरअसल इस बात पर विश्वास ही नहीं किया कि उच्चतर प्राथमिकता सर्वश्रेष्ठ है। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मैने यकीनन फिलीप्पियों 4:19 (एएमपी-अनु) में परमेश्वर के वादे पर विश्वास नहीं किया है: “और मेरा परमेश्वर उदारता के साथ (पूरी तरह से) तुम्हारी हर जरूरत को उसकी जीसस क्राइस्ट में महिमा की समृद्धि के अनुसार पूरी करेगा।” यदि मैं वाकई विश्वास करता हूँ कि परमेश्वर मेरी सारी जरूरतें पूरी करेगा जिससे कि मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो जाऊँ, तो मैं कभी भी किसी और चीज़ कों क्यों वरीयता दूंगा? मैं क्यों किसी मामूली, शॉर्टकट को चुनूंगा जो अंत में एक झूठा वादा साबित होता हो?

“और विश्वास के बिना परमेश्वर को खुश करना असंभव है, क्योंकि जो भी उसके पास आता है उसे यह विश्वास करना चाहिए कि वह मौजूद है और यह कि वह उनको पुरस्कृत करता है जो ईमानदारी से उसे खोजते हैं।” — इब्रानियों 11:6 (एनआईवी-अनु)

जीसस के अनुभव में (मत्ती 4; मरकुस 1; लूका 4), वे किस तरह से 40 दिन के व्रत के बाद शैतान के रोटी के प्रलोभन से कैसे इंकार कर पाए थे। जीसस किस तरह से, शक्ति और अधिकार के एक अपरिवर्तनीय प्रदर्शन के साथ, मंदिर की चोटी से कूद कर एक ही बार में परमेश्वर के पुत्र के रूप में अपनी पहचान को स्थापित करने के शैतान के प्रलोभन से किस तरह से इंकार कर सके, और महिमा में विलंब को चुन सके और अपनी मिनिस्ट्री के बरसों के समय में सारे विरोध, आरोप और उत्पीड़न को को सहन किया। जीसस किस तरह से दुनिया के सारे साम्राज्यों के अधिकार को आसानी से हासिल करने के प्रलोभन से इंकार करने और उसके स्थान पर मृत्यु को चुनने में सक्षम रहे?

उत्तर

इब्रानियों के लेखक हमें उत्तर देते हैं:

“इसलिए, क्योंकि हमारे आसपास गवाहों के बादलों ने घेरा डाला हुआ है, आइये हम भी उलझाने वाली हर उस वस्तु और पाप को दूर करके, धीरज के साथ उस रेस को दौड़ें जिसे हमारे सामने पेश किया गया है, जिसके लिए जीसस पर अपने ध्यान को केन्द्रित करना है, जो विश्वास का कर्ता और परिपूर्णता करने वाला है, जिसने अपने सामने रखे आनंद के लिए कोई लज्जा ना की और क्रूस का दुख सहा परमेश्वर के सिंहासन के दाहिने जा बैठा। तो उसका ध्यान धरो जिसने अपने विरुद्ध पापियों का इतना आतंक सहा, जिससे कि तुम निराश ना हो और थको नहीं। पाप से लड़ते हुए अभी तक इतना प्रतिरोध नहीं किया है कि तुम्हारा लहू बहा हो।” — इब्रानियों 12:1-4 (एनएएसबी-अनु)

मेरे इन सारे सवालों के उत्तर इस अंश में दिए गए हैं। इब्रानियों के लेखक हमें यहां पर महत्वपूर्ण चीजों को ऊपर रखने के सवाल का उत्तर दे रहे हैं।

जीसस हमेशा, थोड़े से समय की राहत और खुशी के सामने सर्वश्रेष्ठ को चुनने में सक्षम रहे थे क्योंकि (1) वे अपने दिल में अपने पिता के वादों पर पक्का विश्वास रखते थे, और (2) उनका विश्वास अडिग था, वे परमपिता परमेश्वर के उनको किए गए वादों पर दृढ़निश्चयी थे। उनकी आँखें पुरस्कार पर स्थिर थीं, और उन्होने उस ध्यान को कभी भी डिगने नहीं दिया।

विश्व परिवर्तक के रूप में आपकी नियति

परमेश्वर के पास आपके लिए बेहतरीन चीजें हैं! वास्तव में, यदि आपका मानना है कि परमेश्वर के आपके लिए प्रयोजन, बेहतरी के लिए पूरी दुनिया को बदलने के प्रभाव से कुछ कम है तो आपकी दृष्टि बहुत छोटी है। बड़ा सोचिए! विश्व को बदलने वाले उस प्रयोजन की कल्पना के लिए समय निकालिए जो भविष्य की पीढ़ियों को प्रभावित करेगा। जबकि आप इसे देख सकते हैं, फिर भी आप उस तस्वीर को पूरी तरह से नहीं देख सकते हैं जिसे परमेश्वर ने आपके लिए नियोजित किया है…लेकिन यह एक शुरुआत है।

“अब जो ऐसा समर्थ है, कि हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस समर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है” — इफिसियों 3:20 (आईबीए)

यदि आप एक अर्थपूर्ण और प्रयोजन से भरे जीवन और विश्व व्यापी परिवर्तन प्रभाव का अनुभव लेने के लिए तैयार हैं, तो परमेश्वर से इसकी मांग करें! जैसा कि याकूब समझाता है, “…तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं।” (याकूब 4:2b आईबीए), या जैसा कि मुझे हाल ही में बताया गया, “तुम्हारे पास बहुत नहीं है क्योंकि तुमने बहुत की मांग नहीं की।” इससे मुझे घोर आश्चर्य हुआ क्योंकि मैने सोचा कि मैने पास बहुत है और, मुझे लगा कि मैं अधिक की मांग कर रहा था। मेरे ख्याल से ये बात दर्शाती है कि मुझे कितना पता था! मैं तब से हर चीज़ की जबरदस्त मांग करने को प्रतिबद्ध रहता हूँ! और जो कुछ भी इस सब कुछ से परे है… मैं उसकी भी मांग करता हूँ!

एक बार जब आपके पास ऐसे जीवन को जीने का विज़न हो जो विश्व को बदलने का प्रभाव रखता हो, तो आपको सच्ची पूर्णता और संतुष्टि को महत्वपूर्ण चीजों को ऊपर रखने से हासिल होने पर विश्वास कायम रखते हुए, अपनी आँखों को मजबूती के साथ सर्वश्रेष्ठ — परम, दीर्घकालिक, स्थायी पुरस्कार — वास्तविक पुरस्कार पर नियत रखने के प्रति एक गंभीर प्रतिबद्धता रखनी चाहिए, ना कि अपने जीवन के किसी क्षेत्र में छोटी-अवधि के विकल्पों को अपनाना चाहिए।

इसके लिए प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प की जरूरत होगी, लेकिन यदि आप सच्ची महानता वाले जीवन को जीने के जरूरी बलिदान करने के लिए तैयार हैं, अपने जीवन की पूर्ण संभावनाओं को हासिल करने के लिए छोटी-अवधि के सुखों के खोखले वादों और प्रलोभनों से ऊपर उठने को तैयार हैं, जिससे एक विश्व-परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ता है जो पूरे अनंत काल में प्रतिध्वनित होता है तो थोड़ा रुकें और अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का परीक्षण करें।

अपने जीवन के हर क्षेत्र का ईमानदारी के साथ मूल्यांकन करने का साहस दिखाएं। आप अपने मूल्यांकन में जितना गहरे जाते हैं, उतना अधिक आपके भविष्य पर प्रभाव पड़ता है। अपने जीवन का मूल्यांकन शुरुल करने में सहायता के लिए इस सवालों का उपयोग करें:

• क्या आपका जीवन वैसा है जो आप इसे बनाना चाहते थे? क्या ये ठीक वैसा है जैसा ये हो सकता था? अपने जीवन में आप क्या अलग चाहते थे?

• यदि कोई कमियां ना होती तो अपने सटीक जीवन की तस्वीर बनाएं — सच्ची महानता वाले जीवन के लिए आपकी गहरी इच्छाएं पूरी करने के लिए रास्ते में कोई बाधा ना हो तो। क्या यह आपके उस जीवन के समान है, जिसे आप जी रहे हैं?

• यदि नहीं तो वह क्या है जो आपको सबसे अच्छा जीवन जीने से रोक रहा है? वह क्या है जो आपको अपनी पूरी संभावनाओं को जीने से रोक रहा है? वह क्या है जो आपको हर उस चीज से परे कर रहा है जिसे आप सबसे अधिक मूल्य देते हैं?

• क्या आप परमेश्वर के साथ पूर्ण सद्भाव में रह रहे हैं?

• आपको क्या बदलाव करने की जरूरत है? आपके जीवन में ऐसी चीजें हो सकती हैं जो आपके नियंत्रण से परे हों, लेकिन जो चीजें आपके नियंत्रण में हैं उन क्षेत्रों में आपने क्या बदलाव किए हैं?

• क्या आप अपने समय को व्यतीत करने के तरीके के कारण शाश्वत पुरस्कारों से वंचित हैं?

• क्या आप अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपने लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के संदर्भ में अपनी स्थिति से संतुष्ट हैं?

1. परमेश्वर के साथ संबंध: परमेश्वर के साथ अपने संबंधों को जीवन की समस्त चीजों के ऊपर रखने के असीमित लाभ हैं। हमारे जीवनों की हर चीज इससे ही उत्पन्न होती है।

2. चरित्र: मजबूत चरित्र का निर्माण व उसका रखरखाव, सत्यनिष्ठा के साथ समझौते से इंकार, अनेकों तरह से लाभ देता है, और परमेश्वर के प्रयोजनों के लिए सिर्फ ***बुलाए ****जाने के लिए नहीं * — बल्कि चुने जाने के लिए महत्वपूर्ण होता है, जैसा कि 2 पतरस 1:10, में पतरस घोषणा करते हैं।

3. परिवार: मजबूत पारिवारिक संबंधों को बनाना व उनकी रक्षा करना, उन निष्ठाओं के साथ धोखाधड़ी से इंकार का लाभ मिलेगा, लेकिन सिर्फ उनको जो हमारे पारिवारिक संबंधों का पालन करेंगे, और जो हमारे जीवनों से दूसरों को संचारित होने वाले संदेशों से होने वाले महत्वपूर्ण प्रभावों के लिए आधार होंगे।

4. अधिकारी, मित्र और परिचित: अधिकारियों के साथ उपयुक्त संबंधों को बनाना व उनको निभाना, और हमारे जीवन के मार्ग से गुजरने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करना, हमें ईसा मसीह के आदेशों को पूरा करने में सहायता करेंगे और हमको जिनके लिए बनाया गया है उन प्रयोजनों को पूरा करते हुए हमें गहन पूर्णता व संतुष्टि की दिशा में ले जाएंगे।

5. स्वास्थ्य: हमारे स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ को चुनना हमें हमारी पूर्ण क्षमता को हासिल करने के लिए ऊर्जा व क्षमता प्रदान करेगा। (सभोपदेशक 10:17)

6. कार्य, मिनिस्ट्री तथा अन्य गतिविधियाँ: क्षणिक सुखो की तुलना में हमारे जीवनों के प्रयोजनों को पूरा करने में सहायक गतिविधियों को हमारा समय देने का चुनाव करना, हमें शाश्वत पुरस्कार देगा।

7. वित्त तथा संपत्ति: हमारे वित्त तथा संपत्तियों के समझदारी भरे रखरखाव से, शाश्वत पुरस्कारों के लिए अस्थायी संपदा और संपत्तियों के विनियम से हमें हमारे जीवनों के और दूसरों को उनके प्रयोजनों को पूरा करने के साधन प्रदान करने में सहायक होगा।

मैं आशा करता हूँ कि आप अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपने लक्ष्यों और प्राथमिकताओं पर गंभीरता से विचार करने का समय निकालेंगे, और अपने जीवन व भविष्य का पूर्ण नेतृत्व करने व उत्तरदायित्व लेने के लिए इच्छुक बनेंगे और अपनी पूरी क्षमता को हासिल करने के लिए जरूरी बदलावों को अंजाम देंगे।

यह एक बार किया जाने वाला मूल्यांकन नहीं है। अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ हासिल करने में यह वाकई आपके लिए बहुत सहायक होगा, जान-बूझकर महत्वपूर्ण चीजों को ऊपर रखना जीवनशैली बन जाना चाहिए। परमेश्वर के वादों में आपकी आस्था, और महत्वपूर्ण चीजों को ऊपर रखने में आपका दृढ़ विश्वास पूरी तरह से अचल बना रहे!