जीवन के ऐसे दो सवाल हैं जिनका उत्तर आपको अवश्य खोजना चाहिए अन्यथा आपका जीवन व्यर्थ है। ये दो सवाल इस प्रकार से हैं:

“मैं कौन हूँ?” और “मैं यहां पर क्यों हूँ?”

“मैं कौन हूँ?” वह सवाल है जो अपनी पहचान की खोज की अभिलाषा के लिए अपने भीतर झांकने को व्यक्त करता है - आप वास्तव में कौन हैं और वास्तव में आपको क्या बनना था।

“मैं यहां क्यों हूँ?” यह सवाल आपके प्रयोजन के खोज की अभिलाषा को व्यक्त करता है—यह जानना कि आपके अस्तित्व को क्या चीज अर्थ प्रदान करती है व पूर्णता देती है।

इन सवालों के उत्तरों और अपनी पहचान व प्रयोजन की खोज में आप जितना अधिक सफल रहेंगे, अपने जीवन में आप उतने अधिक सफल होंगे।

ठीक इसी तरह से आप इन दो सवालों के उत्तरों और अपनी पहचान व प्रयोजन की खोज में आप जितना विफल होंगे अपने जीवन में आप उसी अनुपात में असंतुष्ट महसूस करेंगे।

लेकिन आप शुरु कहां से करें? लेकिन आप कौन हैं और आप यहां पर क्यों आए जैसे सवालों का उत्तर खोजने के लिए आप कहां से शुरुआत करेंगे?

इसके सुराग आपके भीतर छिपे हैं

आपके भीतर कुछ ऐसे सुराग छिपे हैं जो आपको आपके प्रयोजन व नियति का ज्ञान दे सकते हैं। आपको क्या प्रेरित करता है, क्या संचालित करता है और आप का खिचाव किस ओर है; और आपको किससे चिढ़न और अप्रसन्नता होती है, इसका नजदीकी से विश्लेषण करने से आपको खुद की पहचान व अपने जन्म प्रयोजन की अतःदृष्टि हासिल हो जाएगी। आप किस चीज के प्रति जुनूनी हैं? जब आप इसमें वाकई लिप्त हो जाते हैं तो आपको क्या ऊर्जावान करता है? आपकी नैसर्गिक प्रतिभा तथा शक्ति क्या है? ये आपको वे सुराग दे सकते हैं जो आपके पैदा होने के प्रयोजन की खोज में सहायक हो सकते हैं। इन सुरागों को पहचानने व सूचीबद्ध करने में समय देने से आपको अपने प्रयोजन को स्पष्ट करने में भी सहायता मिल सकती है।

जानिए कि कहां न खोजें

आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि अपनी पहचान कहां पर न खोजें।

आपको सावधान रहना चाहिए कि कहीं आप अपनी पहचान किसी ऐसी चीज से जोड़ बैठें जिसे आपसे दूर किया जा सके। आप अपने जीवन की अवधि को किसी सार्थक कारणों से जोड़ सकते हैं, लेकिन जब वह अध्याय बंद हो जाता है और आपका जीवन उस कारण में समान लिप्त भाव से विहीन हो जाए तो क्या आप उस कारण से अपनी पहचान को पृथक कर सकते हैं? क्या आपका जीवन फिर भी सार्थक रहता है? तो फिर आप क्या होते हैं?

आप अपने स्कूल में बहुत लोकप्रिय हो सकते हैं। आप अनेक विद्यार्थी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं जो आपको स्वीकार्यता, प्रशंसा और अनुमोदन का एहसास दे सकती हैं… लेकिन उसके बाद क्या होता है? एक दिन आएगा जब आपके स्कूल की अवधि पूरी हो जाएगी। सारे दोस्त अलग-अलग रास्तों पर जा चुकेंगे। वैसी ही गतिविधियां, आपके लिए फिर से उपलब्ध नहीं होंगी। उसके बाद? उसके बाद आप क्या होंगे? क्या आपके जीवन का कोई प्रयोजन रहेगा?

आप अपना जीवन किसी ऐसे व्यक्ति को समर्पित कर सकते हैं जो आपके जीवन का प्रेम है। आप उस व्यक्ति के साथ अपने संबंधों की खातिर, उन पसंद वाली वस्तुओं का त्याग करके बलिदान कर सकते हैं। आप उस व्यक्ति के साथ अपने संबंधों की खातिर अपनी जीवन-शैली और अपने व्यवहार को बदल सकते हैं, लेकिन क्या हो अगर वह संबंध ही समाप्त हो जाए? क्या हो अगर वह व्यक्ति आपको छोड़ दे जिसके लिए आपने अपना जीवन समर्पित कर रखा है? या उसकी मृत्यु हो जाए? फिर इसके बाद आप क्या हैं? क्या आपकी पहचान अपने संबंध में इतनी अधिक लिप्त थी कि आपको पता ही नहीं है उस संबंध से अलग हो कर आप क्या हैं? क्या आपका जीवन फिर भी सार्थक रहता है?

अपने बच्चों की खातिर अपनी इच्छाओं और सुखों का बलिदान करके आप अपने परिवार के परिवार के प्रति समर्पित हो सकते हैं। आपके विचार व गतिविधियां पूरी तरह से आपके बच्चों के इर्दगिर्द घूम सकती हैं। लेकिन एक दिन, आपके बच्चे आपको छोड़ देंगे, इसलिए नहीं कि आप वे आपके बलिदान का मूल्य नहीं समझते बल्कि इसलिए कि अब वयस्क रूप से स्वतंत्र जीवन जीने और उनके अपने बच्चों को पालने पोसने का उनका समय आ गया है। उसके बाद? जब हर वो चीज जिस पर आपने अपने जीवन को केन्द्रित कर रखा है और जिसके लिए आपने अपना जीवन दे डाला है, आपको पीछे छोड़ कर घर से बाहर चल देती है, तो क्या बचता है? क्या फिर भी आपकी कोई पहचान होगी? अपने बच्चों से अलग होकर आप क्या हैं? क्या आपके जीवन का कोई प्रयोजन रहेगा? क्या आगे जीवन जीने के लिए आपके पास कोई सम्मोहक कारण होगा?

किसी ऐसे काम के लिए जिसे शायद आपने न चुना हो, अपने सर्वश्रेष्ठ वर्षों को देते हुए, पूरे वयस्क जीवन में ईमानदारी के काम करते हुए आप अपने जीवन को एक कैरियर के प्रति समर्पित कर सकते हैं। एक दिन वह काम समाप्त हो जाएगा। रोज सुबह उठना, काम पर जाने के लिए तैयार होना और उसी काम के लिए एक ही रास्ते पर आने-जाने का समय समाप्त हो जाएगा। जब आप इतनी मेहन से काम करते हुए कल बढ़ई, शिक्षक या तकनीशियन न होंगे तो आप क्या होंगे? उसके बाद आप क्या होंगे? अनेक लोग अपने काम से सेवानिवृत्त होकर शीघ्र मर जाते हैं। क्या आप उनमें से एक होना चाहते हैं जिनके जीवन का अपने काम के अतिरिक्त कोई अर्थ नहीं है? क्या आप काम के बाद के जीवन में अपनी पहचान और प्रयोजन को जानने में सक्षम होंगे?

ऐसी कोई भी चीज जिसे आप खो दें या जिसे कोई अपने साथ ले जा सके, आपकी पहचान और आपकी वास्तविकता दर्शाने के लिए स्थायी स्रोत नहीं मानी जा सकती है। आपको अपने भीतर किसी ऐसे की खोज करनी चाहिए जो नैसर्गिक रूप से आपके भीतर इतना शामिल हो कि जीवन, संबंधों, पदों यहां तक कि शारीरिक गुणों व क्षमताओं को भी आप खो दें, फिर भी आपकी मूल पहचान हिले तक नहीं। यह संभव है! आप खुद की पहचान को लेकर अपनी पूर्ण समझ की गहराई को हासिल कर सकते हैं।

आपकी वास्तविक पहचान—आप वास्तव में कौन हैं—आपसे छीनी नहीं जा सकती है। आप उसे कभी भी खो नहीं सकते हैं। आपके लिए यह संभव है कि आप क्या हैं, इसकी समझ में इतनी मजबूती हासिल कर लें कि इस दुनिया की कोई भी ताकत आपको हिला न सके या आपकी पहचान में आपके ठोस आत्मविश्वास को गंभीर चुनौती दे सके। उसे पाना—उस पहचान को खोजना जो आपसे अभिन्न है—एक वास्तविक चुनौती है! एक बार जब आप इसे खोज लेते हैं, तो आपमें वह सुरक्षा, शांति और आत्मविश्वास की भावना आ जाती है, जो आपमें पहले कभी न थी।

अपने वर्तमान से बड़ा जीवन जिएं!

अपने जीवन, संबंधों, माता-पिता, नौकरी, संगठनों में पदों की भूमिकाओं में आपके सीमित प्रयोजन सिद्ध हो सकते हैं। लेकिन जीवन की भूमिकाएं अक्सर अस्थायी होती हैं। ठीक उसी तरह जैसे कि कोई अभिनेता कोई विशिष्ट भूमिका निभाता है और फिर दूसरी फिल्मों की भूमिकाओं की ओर बढ़ जाता है, उसी तरह से आप अपने जीवन की यात्रा में अनेक भूमिकाएं निभाते हैं। संबंध आते हैं और चले जाते हैं। बच्चे बड़े होते हैं और बाहर निकल जाते हैं। आप कंपनियों या संगठनों में ऐसे पदों की भूमिकाओं में होते हैं जो अतंतः समाप्त हो जाती हैं।

लेकिन सबसे अधिक पूर्ण, संतुष्ट जीवन को वास्तव में जीने के लिए आपको किसी ऐसे कारण की खोज करनी चाहिए जो आपके वर्तमान जीवन से बड़ा और व्यापक हो। आपको एक ऐसा महान व व्यापक प्रयोजन खोजना चाहिए जो आपके अपने अस्तित्व से ऊंचा हो, जो मात्र आपके जीवन या आपके जीवनकाल तक सीमित न हो, बल्कि जीने के लिए आपको एक ऐसा कारण खोजना चाहिए जिसका आपके तात्कालिक प्रभाव क्षेत्र से कहीं आगे तक महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव हो। आपको अपने जीवन को किसी एक ऐसे महान कारण के लिए निवेश करना चाहिए, जिसका सकारात्मक प्रभाव आपके जीवित न रहने पर समाप्त न हो जाए, बल्कि वह ऐसा हो जिसका प्रभाव सदा के लिए, अनंत काल में भी प्रतिध्वनित होता रहे। यदि आपको अपने महान जीवन का प्रयोजन मिल जाए तो ब्रह्मांड अपने आप ही आपके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव की प्रतिक्रिया देगा।

आपको अपने आप से और अपने जीवन से बड़े उस कारण की खोज अवश्य करनी चाहिए। आपको एक ऐसा कारण अवश्य खोजना चाहिए जिससे आप अपने जीवन का विनिमय कर सके, जो इतना मूल्यवान हो कि उसके लिए मर जाना भी लाभप्रद हो।

जैसा बिल गोथार्ड ने कहा, “यदि आपके जीवन में ऐसा कुछ नहीं है कि जिसके लिए आप मर सकें तो आपका जीना व्यर्थ है।”

लेकिन क्या आप वह सही कारण, सही प्रयोजन खोज सकते हैं, जो आपसे बड़ा हो, जिसके लिए जीवन को बलिदान कर देना भी लाभकारी हो, जो आपको जीवन में परम संतुष्टि देगा, जो आपके जीवन के अर्थ और प्रयोजन को पूर्ण करेगा? जीवन जीने के इस कारण को खोजना, उस सवाल का जवाब हो सकता है, जो बताता है कि आप यहां पर क्यों हैं, लेकिन आप उससे जुड़ेंगे कैसे?

आप कैसे जानेंगे कि वास्तव आप कौन हैं, आप क्या बनने के लिए जन्मे हैं, और इस जीवन में आप वास्तव में क्या हासिल करने आए थे?

ये सवाल आपसे कहीं अधिक बड़े हैं। इनके उत्तरों को खोजने के लिए आपको किसी उच्च स्रोत के पास जाना चाहिए, कोई ऐसा जो आपसे बड़ा हो। इन सवालों के पूर्ण व संतोषजनक उत्तर आपको केवल उससे जुड़ कर मिलेंगे जिसने आपको बनाया है, वह जिसने आपको यहां पर रखा हुआ है, वह जिसने आपके हृदय में प्रयोजन व अर्थ की अभिलाषा को रखा है। आपको अपने निर्माता से जुड़ना चाहिए। उसने न केवल आपको बनाया है बल्कि उसने उस महान प्रयोजन को डिजाइन व नियोजित किया है जिसे पूरा करने के लिए आपको बनाया गया है! एकमात्र वही है जो आपकी पहचान व प्रयोजन के बारे में सवालों के उत्तर दे सकता है।